Guar Mandi Taza Bhav Today: पिछले कई वर्षों से ग्वार की खेती करने वाले किसानों के लिए बाजार का हाल निराशाजनक रहा है। बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी की लागत लगातार बढ़ती गई, लेकिन मंडियों में मिलने वाले दाम उस रफ्तार से आगे नहीं बढ़ पाए। इसी कारण कई किसानों ने ग्वार की जगह दूसरी फसलों को अपनाना शुरू कर दिया था। लेकिन अब हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। आज ग्वार मंडियों से जो संकेत मिल रहे हैं, उन्होंने पूरे बाजार में नई हलचल पैदा कर दी है।
अचानक आई मजबूती से न सिर्फ भाव बढ़े हैं, बल्कि किसानों और व्यापारियों के बीच चर्चा भी तेज हो गई है। लंबे समय बाद ग्वार फिर से सुर्खियों में है और ऐसा लग रहा है कि यह फसल दोबारा किसानों की आमदनी का मजबूत सहारा बन सकती है। मौजूदा तेजी ने उम्मीद जगाई है कि आने वाले समय में हालात और बेहतर हो सकते हैं।
आज देश की प्रमुख ग्वार मंडियों में चल रहे ताजा भाव
इस समय देश की अलग-अलग ग्वार मंडियों में भावों में साफ मजबूती देखने को मिल रही है। हालांकि माल की क्वालिटी, नमी और साफ-सफाई के हिसाब से दामों में अंतर बना हुआ है, लेकिन कुल मिलाकर बाजार का रुख सकारात्मक बना हुआ है। कई मंडियों में खरीदारी पहले के मुकाबले तेज हुई है और आवक सीमित रहने से भावों को सहारा मिला है।
| मंडी का नाम | आज का ग्वार भाव (₹ प्रति क्विंटल) |
|---|---|
| श्रीगंगानगर | ₹5,450 – ₹5,600 |
| हनुमानगढ़ | ₹5,400 – ₹5,550 |
| सादुलपुर | ₹5,350 – ₹5,500 |
| नोहर | ₹5,300 – ₹5,450 |
| बीकानेर | ₹5,150 – ₹5,350 |
इन भावों से यह साफ हो रहा है कि ग्वार का बाजार धीरे-धीरे मजबूती की ओर बढ़ रहा है और खरीदार अब पहले से ज्यादा सक्रिय नजर आ रहे हैं।
करीब 16 साल बाद क्यों बदला ग्वार का बाजार मिजाज
जब भी ग्वार के दामों में तेजी आती है, तो पुराने किसान उस दौर को याद करने लगते हैं जब ग्वार ने ऐतिहासिक ऊंचाइयों को छुआ था। उस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में ग्वार गम की भारी मांग थी और सीमित सप्लाई के चलते भाव लगातार ऊपर जाते चले गए थे।
अब लगभग 16 साल बाद फिर से कुछ वैसी ही परिस्थितियां बनती दिख रही हैं। विदेशी बाजारों से ग्वार गम की पूछ बढ़ रही है और घरेलू स्तर पर उपलब्ध स्टॉक भी ज्यादा नहीं बताया जा रहा। इसी वजह से ग्वार एक बार फिर व्यापारियों और किसानों के बीच चर्चा का केंद्र बन गया है।
ग्वार के भाव में तेजी आने के पीछे क्या वजहें हैं
ग्वार के भावों में आई मजबूती किसी एक कारण से नहीं हुई है। इसके पीछे कई अहम वजहें एक साथ काम कर रही हैं। सबसे बड़ा कारण निर्यात मांग में सुधार माना जा रहा है। ग्वार गम का उपयोग तेल और गैस उद्योग के अलावा फूड प्रोसेसिंग और फार्मा सेक्टर में भी बढ़ा है।
इसके साथ ही कुछ इलाकों में इस साल उत्पादन अनुमान से कम रहने की खबरें हैं। जब मंडियों में माल की आवक कम होती है और मांग बनी रहती है, तो इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ता है। इसके अलावा व्यापारियों की सक्रियता और सीमित स्टॉक भी भावों को मजबूती दे रहा है।
क्या ग्वार के दाम फिर बना सकते हैं नया रिकॉर्ड
फिलहाल बाजार में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ग्वार के भाव दोबारा पुराने रिकॉर्ड की ओर बढ़ सकते हैं। जानकारों का मानना है कि मौजूदा स्तर से आगे बढ़ने के लिए अंतरराष्ट्रीय मांग का लगातार मजबूत बने रहना जरूरी होगा। साथ ही लंबे समय तक सप्लाई की कमी भी भावों को सहारा दे सकती है। हालांकि यह भी तय है कि रास्ते में उतार-चढ़ाव आते रहेंगे, क्योंकि ग्वार का बाजार पहले भी अचानक तेज और फिर अचानक कमजोर होता रहा है।
मौजूदा हालात में किसानों के लिए क्या रणनीति सही रहेगी
इस समय आई तेजी किसानों के लिए राहत लेकर आई है, लेकिन जल्दबाजी करना नुकसानदेह हो सकता है। जिन किसानों के पास अच्छी क्वालिटी का ग्वार स्टॉक में है, वे एक साथ पूरा माल बेचने की बजाय चरणबद्ध तरीके से बिक्री करने पर विचार कर सकते हैं। इसके साथ ही मंडी भाव, निर्यात से जुड़ी खबरों और बाजार के रुझान पर लगातार नजर रखना जरूरी है। सोच-समझकर लिया गया फैसला किसानों को बेहतर आमदनी दिला सकता है।
आने वाले दिनों में ग्वार बाजार की दिशा क्या हो सकती है
आगे चलकर ग्वार के भाव कई अहम बातों पर निर्भर करेंगे, जैसे निर्यात ऑर्डर की स्थिति, अंतरराष्ट्रीय बाजार का रुख, घरेलू स्टॉक और नई फसल के अनुमान। फिलहाल इतना तय है कि लंबे समय बाद ग्वार बाजार में नई जान आई है। अब देखना यह होगा कि यह तेजी कितनी दूर तक जाती है और क्या ग्वार फिर से अपने सुनहरे दौर की ओर कदम बढ़ा पाता है या नहीं।