Guar Mandi Bhav Today: पिछले कई सालों से ग्वार का बाजार अपेक्षाकृत शांत बना हुआ था। किसान ग्वार की खेती तो कर रहे थे, लेकिन भाव ऐसे नहीं मिल पा रहे थे जो उन्हें ज्यादा मुनाफा दे सकें। इसी वजह से धीरे-धीरे ग्वार कई इलाकों में किसानों की प्राथमिक फसल की सूची से बाहर होता चला गया।
लेकिन अब हालात बदलते हुए दिखाई दे रहे हैं। करीब 16 साल बाद ग्वार के भावों में फिर से जान आती नजर आ रही है। मंडियों में अचानक बढ़ी खरीद, व्यापारियों की सक्रियता और निर्यात से जुड़ी सकारात्मक खबरों ने पूरे बाजार का माहौल बदल दिया है। किसान जहां बेहतर दाम की उम्मीद करने लगे हैं, वहीं व्यापारी आने वाले समय को लेकर रणनीति बना रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह तेजी सिर्फ कुछ दिनों की है या फिर ग्वार एक बार फिर पुराने सुनहरे दौर की ओर बढ़ रहा है। आइए विस्तार से समझते हैं आज के ग्वार भाव, तेजी के कारण और आगे का संभावित ट्रेंड।
आज ग्वार मंडियों में क्या चल रहा है ताजा भाव
देश की प्रमुख ग्वार मंडियों में आज भाव पहले के मुकाबले मजबूत दिखाई दे रहे हैं। हालांकि क्वालिटी, नमी और आवक के हिसाब से रेट में अंतर देखा जा रहा है, लेकिन बाजार का रुख फिलहाल सकारात्मक है।
| मंडी का नाम | आज का ग्वार भाव (₹ प्रति क्विंटल) |
|---|---|
| श्रीगंगानगर | ₹5,450 – ₹5,600 |
| हनुमानगढ़ | ₹5,400 – ₹5,550 |
| सादुलपुर | ₹5,350 – ₹5,500 |
| नोहर | ₹5,300 – ₹5,450 |
| बीकानेर | ₹5,150 – ₹5,350 |
इन भावों से साफ है कि ग्वार धीरे-धीरे मजबूती की ओर बढ़ रहा है और बाजार में फिर से गतिविधियां तेज हो रही हैं।
16 साल बाद ग्वार क्यों बना चर्चा का विषय
जब भी ग्वार में तेजी आती है, तो पुराने किसान तुरंत 2010–2012 का दौर याद करने लगते हैं। उस समय ग्वार ने ऐसे भाव दिखाए थे, जिनकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।
अब एक बार फिर बाजार में कुछ वैसे ही संकेत नजर आने लगे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ग्वार गम की मांग बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं। इसके साथ ही घरेलू मंडियों में स्टॉक सीमित बताया जा रहा है। यही कारण है कि ग्वार करीब 16 साल बाद फिर से चर्चा के केंद्र में आ गया है।
ग्वार के भाव बढ़ने के पीछे मुख्य वजहें
मौजूदा तेजी सिर्फ एक कारण से नहीं आई है, बल्कि इसके पीछे कई फैक्टर काम कर रहे हैं।
- निर्यात मांग में सुधार: ग्वार गम का इस्तेमाल तेल, गैस और फूड इंडस्ट्री में बड़े स्तर पर होता है। विदेशों से मांग बढ़ने का असर सीधे भावों पर पड़ रहा है।
- सीमित आवक: कई क्षेत्रों में इस साल पैदावार उम्मीद से कम रही, जिससे मंडियों में माल की उपलब्धता घट गई।
- व्यापारियों की खरीदारी: भविष्य में और तेजी की उम्मीद में व्यापारी स्टॉक बनाने लगे हैं।
- बाजार की धारणा: जब बाजार में पॉजिटिव माहौल बनता है, तो तेजी अपने-आप रफ्तार पकड़ लेती है।
क्या ग्वार ₹30,000 प्रति क्विंटल तक जा सकता है?
यह सवाल हर किसान और कारोबारी के मन में चल रहा है। फिलहाल मौजूदा भावों से सीधे ₹30,000 तक पहुंचना आसान नहीं माना जा रहा। लेकिन बाजार जानकारों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डिमांड बहुत तेज होती है और सप्लाई और ज्यादा टाइट हो जाती है, तो लंबे समय में बड़े आंकड़े देखने को मिल सकते हैं।
हालांकि यह भी याद रखना जरूरी है कि ग्वार का बाजार पहले भी बहुत उतार-चढ़ाव वाला रहा है। इसलिए किसी भी एक अनुमान पर पूरी तरह भरोसा करना समझदारी नहीं होगी।
किसानों के लिए मौजूदा समय में क्या रणनीति सही रहेगी
मौजूदा हालात किसानों के लिए उम्मीद जरूर जगाते हैं, लेकिन जल्दबाजी नुकसान भी करा सकती है। जिन किसानों के पास अच्छी क्वालिटी का ग्वार है, वे एक साथ पूरा माल बेचने के बजाय किस्तों में बिक्री करने पर विचार कर सकते हैं।
इसके साथ ही मंडी भाव, निर्यात से जुड़ी खबरें और सरकारी नीतियों पर नजर बनाए रखना बेहद जरूरी है। सही समय पर लिया गया फैसला ही असली मुनाफा दिला सकता है।
आगे ग्वार बाजार का रुख क्या हो सकता है
आने वाले हफ्तों में ग्वार के भाव कई बातों पर निर्भर करेंगे—निर्यात ऑर्डर, घरेलू स्टॉक, नई फसल के अनुमान और वैश्विक बाजार की स्थिति।
फिलहाल इतना तय है कि 16 साल बाद ग्वार ने फिर से बाजार में हलचल मचा दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह तेजी कितनी दूर तक जाती है और क्या ग्वार एक बार फिर इतिहास रच पाता है या नहीं।