Income Tax Slab Budget 2026: हर साल बजट आते ही सबसे ज्यादा चर्चा जिस विषय पर होती है, वह है इनकम टैक्स। 2026 का केंद्रीय बजट भी कुछ ऐसा ही रहा, जहां नौकरीपेशा लोगों, छोटे व्यापारियों और मिडल क्लास परिवारों की नजर टैक्स स्लैब पर टिकी हुई थी। महंगाई लगातार बढ़ रही है और घरेलू खर्च पहले से ज्यादा हो चुके हैं, ऐसे में लोग उम्मीद कर रहे थे कि टैक्स में बड़ी राहत मिलेगी।
हालांकि इस बार टैक्स स्ट्रक्चर में बहुत बड़ा बदलाव नहीं किया गया, लेकिन कुछ अहम फैसलों और आंकड़ों ने यह जरूर साफ कर दिया कि सरकार टैक्स सिस्टम को आसान और स्थिर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। नई टैक्स व्यवस्था की लोकप्रियता बढ़ना भी इसी बात का संकेत है। कई टैक्सपेयर्स के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन और कम टैक्स दरों का फायदा पहले से ज्यादा दिखाई दे रहा है। आइए विस्तार से समझते हैं कि बजट 2026 में टैक्स से जुड़ी कौन-कौन सी बातें अहम रहीं।
टैक्सपेयर्स से जुड़े नए आंकड़े क्या बताते हैं
सरकारी डेटा के अनुसार देश में करोड़ों लोग हर साल आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं और इनमें बड़ी संख्या नई टैक्स व्यवस्था चुन रही है। इसकी वजह सरल नियम और कम जटिलता मानी जा रही है। मिडल क्लास टैक्सपेयर्स का बड़ा हिस्सा 10 लाख रुपये सालाना आय से नीचे आता है, इसलिए टैक्स स्लैब में छोटा बदलाव भी करोड़ों लोगों को प्रभावित करता है। यही कारण है कि बजट के दौरान टैक्स से जुड़े हर अपडेट पर लोगों की खास नजर रहती है।
नए टैक्स स्लैब की पूरी जानकारी (तालिका)
| वार्षिक आय (रुपये) | टैक्स दर |
|---|---|
| ₹4 लाख तक | 0% |
| ₹4 – ₹8 लाख | 5% |
| ₹8 – ₹12 लाख | 10% |
| ₹12 – ₹16 लाख | 15% |
| ₹16 – ₹20 लाख | 20% |
| ₹20 – ₹24 लाख | 25% |
| ₹24 लाख से ऊपर | 30% |
नोट: अंतिम टैक्स देनदारी व्यक्ति की कुल आय, कटौती और अन्य नियमों पर निर्भर करती है।
स्टैंडर्ड डिडक्शन का कर्मचारियों पर असर
स्टैंडर्ड डिडक्शन को जारी रखना नौकरीपेशा लोगों और पेंशनर्स के लिए राहत की खबर मानी जा रही है। इससे टैक्स योग्य आय कम हो जाती है, जिससे कई मामलों में टैक्स देनदारी घट सकती है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी व्यक्ति की आय थोड़ी ज्यादा है, तो डिडक्शन के बाद उसका टैक्स स्लैब बदल सकता है। यही वजह है कि यह सुविधा सैलरी क्लास के लिए काफी अहम मानी जाती है।
महंगाई और टैक्स के बीच संतुलन की चुनौती
पिछले कुछ वर्षों में रोजमर्रा की चीजों, शिक्षा और स्वास्थ्य खर्च में काफी बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में लोग उम्मीद कर रहे थे कि टैक्स स्लैब में बड़ा बदलाव होगा। लेकिन सरकार के सामने राजस्व बनाए रखने की भी बड़ी जिम्मेदारी होती है। टैक्स से मिलने वाली राशि देश के विकास और योजनाओं में इस्तेमाल होती है, इसलिए टैक्स दरों में बड़ा बदलाव करना आसान नहीं होता। यही वजह है कि इस बार स्लैब में स्थिरता देखने को मिली।
मिडल क्लास पर क्या असर पड़ सकता है
मिडल क्लास के लिए यह बजट मिश्रित संकेत लेकर आया है। जहां एक तरफ टैक्स ढांचा स्थिर रहा, वहीं दूसरी तरफ नई टैक्स व्यवस्था की सरलता ने कुछ राहत जरूर दी है। कम आय वाले लोगों के लिए टैक्स दरें अपेक्षाकृत कम रहने से हाथ में बचने वाली रकम थोड़ी बढ़ सकती है। हालांकि कई लोगों का मानना है कि बढ़ती महंगाई के हिसाब से भविष्य में टैक्स स्लैब में और बदलाव जरूरी हो सकते हैं।
सरकार की रणनीति और आगे की संभावना
सरकार का फोकस फिलहाल टैक्स सिस्टम को आसान और डिजिटल बनाने पर ज्यादा दिखाई देता है। नई टैक्स व्यवस्था को बढ़ावा देना भी इसी रणनीति का हिस्सा है। आने वाले वर्षों में अगर आर्थिक स्थिति और महंगाई के आंकड़ों में बदलाव होता है, तो टैक्स स्लैब में संशोधन की संभावना भी बनी रह सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि धीरे-धीरे टैक्स नियम और सरल होते जाएंगे।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर बजट 2026 में टैक्स स्लैब में बड़ा बदलाव नहीं हुआ, लेकिन सिस्टम को सरल और स्थिर रखने की कोशिश जरूर दिखाई दी। नई टैक्स व्यवस्था की लोकप्रियता बढ़ना और स्टैंडर्ड डिडक्शन का जारी रहना मिडल क्लास के लिए सकारात्मक संकेत है। आने वाले समय में अगर महंगाई को ध्यान में रखते हुए टैक्स नियमों में और सुधार किया जाता है, तो यह आम करदाताओं के लिए बड़ी राहत बन सकता है। फिलहाल समझदारी इसी में है कि टैक्स प्लानिंग सही तरीके से की जाए और सरकारी अपडेट पर नजर बनाए रखी जाए।